ग्रहों और कर्म का संबंध: ज्योतिषीय दृष्टिकोण | The Relationship Between Planets and Karma: An Astrological Perspective
ग्रहों और कर्म का संबंध: ज्योतिषीय दृष्टिकोण | The Relationship Between Planets and Karma: An Astrological Perspective ग्रहों और कर्म का संबंध: ज्योतिषीय दृष्टिकोण The Relationship Between Planets and Karma: An Astrological Perspectiv e भूमिका (Introduction) भारतीय ज्योतिष केवल भविष्य जानने का साधन नहीं है, बल्कि यह कर्म के सिद्धांत को समझने की एक गहरी विद्या है। हमारे शास्त्र कहते हैं— “यथा कर्म तथा फलम्” अर्थात जैसा कर्म, वैसा फल। ज्योतिष के अनुसार, ग्रह हमारे जीवन के संचालक नहीं हैं, बल्कि वे हमारे पूर्व जन्म और वर्तमान जन्म के कर्मों के संकेतक हैं। इस लेख में हम समझेंगे कि ग्रह और कर्म का आपस में क्या संबंध है, और कैसे ज्योतिष हमें अपने जीवन को सुधारने का मार्ग दिखाता है। कर्म का सिद्धांत: संक्षिप्त परिचय कर्म तीन प्रकार के माने गए हैं: संचित कर्म – पिछले जन्मों में किए गए कर्मों का भंडार प्रारब्ध कर्म – वर्तमान जन्म में भोगे जाने वाले कर्म क्रियमाण कर्म – इस जीवन में किए जा रहे कर्म ज्योतिष मुख्यतः प्रारब्ध कर्म को दर्शाता है, जबकि क्रियमाण कर्म से हम अपने भविष्य को बद...