सुबह की शुरुआत कैसी हो – ऋषियों की दृष्टि से | How should the morning begin – from the perspective of the sages - Blog 68
सुबह की शुरुआत कैसी हो – ऋषियों की दृष्टि से |
How should the morning begin – from the perspective of the sages
“सुबह की शुरुआत कैसी हो – ऋषियों की दृष्टि से” पर एक सुंदर, सरल और प्रभावशाली ब्लॉग पोस्ट दिया गया है—
🌅 सुबह की शुरुआत कैसी हो – ऋषियों की दृष्टि से
How should the morning begin – from the perspective of the sages
भारतीय ऋषि-मुनि हमेशा कहते थे कि “जैसी सुबह, वैसा पूरा दिन।”
उनके अनुसार सुबह का समय सिर्फ एक शुरुआत नहीं, बल्कि ऊर्जा, शुद्धि, मनोबल और दिशा का स्रोत होता है। आज के समय में चाहे व्यक्ति कितना भी व्यस्त क्यों न हो, यदि वह सुबह को सही ढंग से शुरू करे, तो उसका पूरा जीवन बदल सकता है।
⭐ 1. ब्रह्ममुहूर्त में जागना
समय: सूर्योदय से लगभग 1.5 घंटे पहले (लगभग 4:30–5:00 AM)
ऋषि मानते थे कि यह समय
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मन को अत्यंत शांत,
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वातावरण को सकारात्मक,
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और चेतना को जागृत करने वाला होता है।
इसी समय किए गए कार्य—जैसे ध्यान, जप, प्रार्थना—बहुत गहराई से असर करते हैं।
⭐ 2. आंखें खोलते ही कृतज्ञता
जागते ही धरती को छूकर "क्षमा और कृतज्ञता" व्यक्त करना एक पुरानी ऋषि परंपरा है।
इससे मन में विनम्रता आती है और मानसिक तनाव घटता है।
संस्कृत मंत्र:
“समुद्रवसने देवी पर्वतस्तनमण्डले ।
विष्णुपत्नि नमस्तुभ्यं पादस्पर्शं क्षमस्व मे ॥”
अर्थ: हे धरती माता, मैं आपको स्पर्श करता हूँ, मुझे क्षमा करें।
⭐ 3. पानी पीना (उषापान)
सुबह उठकर गुनगुना या तांबे के पात्र का पानी पीना अग्नि (डाइजेशन) को बल देता है।
ऋषि कहते थे कि उषापान अमृत समान है—यह शरीर की सफाई और मन की स्पष्टता के लिए सर्वोत्तम है।
⭐ 4. ध्यान, प्राणायाम और जप
ऋषियों की दृष्टि में सुबह का आध्यात्मिक अभ्यास पूरे दिन के लिए मानसिक कवच बन जाता है।
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5–10 मिनट ध्यान
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अनुलोम-विलोम, कपालभाति, भ्रामरी
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अपने ईष्ट मंत्र या ओम का जप
इससे:
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तनाव कम होता है
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मन एकाग्र होता है
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दिल और दिमाग दोनों संतुलित रहते हैं
⭐ 5. सूर्य को प्रणाम और सूर्ययोग
सूर्योदय से पहले या ठीक सूर्योदय पर की गई सूर्य-उपासना ऋषियों का अनिवार्य नियम थी।
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सूर्य नमस्कार
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सूर्य सहाय प्राणायाम
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सूर्य को जल अर्पण (आखिरी 1–2 मिनट सीधे सूर्य की ओर देखे बिना)
इससे ऊर्जा, आत्मविश्वास और प्रतिरक्षा शक्ति बढ़ती है।
⭐ 6. पवित्र संकल्प (Positive Sankalp)
ऋषि कहते थे कि “मन जैसा सोचता है, वैसा बन जाता है।”
सुबह 20–30 सेकंड के लिए अपने दिन का संकल्प लें:
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आज मैं शांत रहूंगा
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आज मैं अपना श्रेष्ठ दूंगा
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आज मैं ईर्ष्या, क्रोध, तुलना से दूर रहूंगा
यह छोटा सा संकल्प दिन को सकारात्मक रूप से नियंत्रित करने में मदद करता है।
⭐ 7. स्वच्छता और स्नान
ऋषियों के अनुसार यह केवल शरीर की सफाई नहीं है, बल्कि ऊर्जा का नव-जीवन है।
स्नान के बाद मन अधिक निर्मल और जागरूक होता है।
⭐ 8. ज्ञान का ग्रहण – स्वाध्याय
सुबह 10–15 मिनट के लिए किसी पवित्र ग्रंथ, विचारशील पुस्तक या प्रेरक चीज़ का अध्ययन मन को स्थिरता देता है।
⭐ 9. पौष्टिक और हल्का नाश्ता
ऋषि हमेशा कहते थे:
“सात्त्विक भोजन, सात्त्विक मन बनाता है।”
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मौसमी फल
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हल्का दलिया/पोहे/उपमा
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गुड़, भिगोए हुए बादाम
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बहुत हल्का गर्म दूध (यदि अनुकूल हो)
⭐ 10. सेवा-भाव और नम्रता
दिन की शुरुआत किसी छोटे से सद्भाव के विचार से करें—किसी की मदद करने की भावना।
यही ऋषि-मार्ग का मूल है: सेवा ही सच्चा आनंद देती है।
🌼 सार (Conclusion)
ऋषियों के अनुसार सुबह की सही शुरुआत केवल आदत नहीं, एक आध्यात्मिक प्रक्रिया है—
जो शरीर, मन और आत्मा तीनों को संतुलित करती है।
यदि आप सिर्फ 10–20% भी इन आदतों को अपनाते हैं, तो आपकी ऊर्जा, मन की शांति और आत्मविश्वास में अद्भुत बदलाव दिखाई देगा।
यहाँ सुबह की शुरुआत के लिए ऋषियों द्वारा बताए गए कुछ शक्तिशाली मंत्र दिए गए हैं। आप इनमें से कोई भी मंत्र रोज़ सुबह ब्रह्ममुहूर्त या सूर्योदय के समय जप सकते हैं:
🌞 1. “ॐ” (प्रणव मंत्र)
सबसे श्रेष्ठ, सबसे सरल और सबसे शक्तिशाली मंत्र।
मंत्र:
👉 ॐ
लाभ:
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मन तुरंत शांत होता है
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ऊर्जा बढ़ती है
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नकारात्मकता दूर होती है
🌅 2. गायत्री मंत्र
ज्ञान, प्रकाश और सकारात्मक ऊर्जा का महान मंत्र।
मंत्र:
👉 ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं
भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ॥
लाभ:
-
बुद्धि का विकास
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निर्णय शक्ति
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मानसिक शांति
🌄 3. महामृत्युंजय मंत्र
स्वास्थ्य, सुरक्षा और लंबी आयु के लिए।
मंत्र:
👉 ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगंधिं पुष्टिवर्धनम्
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॥
लाभ:
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भय, तनाव और चिंता दूर
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शरीर और मन की रक्षा
🌻 4. सूर्य नमस्कार मंत्र (सूर्य उपासना के लिए)
सुबह सूर्य को जल चढ़ाते समय।
मंत्र:
👉 ॐ सूर्याय नमः
या
👉 ॐ आदित्याय नमः
लाभ:
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ऊर्जा बढ़ती है
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पाचन सुधरता है
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सकारात्मकता आती है
🙏 5. सुबह उठकर पृथ्वी को स्पर्श करते समय मंत्र
मंत्र:
👉 “समुद्रवसने देवी पर्वतस्तनमण्डले
विष्णुपत्नि नमस्तुभ्यं पादस्पर्शं क्षमस्व मे”
लाभ:
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विनम्रता, कृतज्ञता
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मन शांत और स्थिर
🌺 6. शांतिपाठ (दिन की अच्छी शुरुआत के लिए)
मंत्र:
👉 ॐ सह नाववतु सह नौ भुनक्तु सह वीर्यं करवावहै
तेजस्वि नावधीतमस्तु मा विद्विषावहै ॥
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
लाभ:
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घर और मन में शांति
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तनाव कम
आप रोज़ सुबह आंखें खोलते ही अपनी दोनों हथेलियों को देखकर यह मंत्र बोल सकते हैं:
🙏7. कराग्रे वसते लक्ष्मी मंत्र
मंत्र:
👉 कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती।
करमूले स्थितो ब्रह्मा प्रातःकाले दर्शनम् ॥
🌼 अर्थ (सरल भाषा में):
हथेलियों के अग्रभाग में लक्ष्मी (धन–समृद्धि) का वास है,
हथेलियों के मध्य में सरस्वती (विद्या–बुद्धि) का,
और हथेलियों के मूल में ब्रह्मा (सृजन–शक्ति) का।
इसलिए सुबह सबसे पहले अपनी हथेलियों का दर्शन करना शुभ है।
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